Software Configure करते-२ आज, जब दिल मेरा ये उदास हो गया |
पुराने भूले दर्द का आज फिर से अहसास हो गया |
दर्द है ये Linux का , गर आपको सुनाऊंगा,
open source ki की दुहाई देते हुए , Easy to configure का Answer ही पहुँगा |
हर थक के जब ये दिल उदास हो गया, तो सोचा कल Guide के पास जाऊंगा, उनको अपनी कहानी सुनाऊंगा |
फिर दिल से आवाज आई की अगर अब Guide के पास जाऊंगा, तो अपना Impression ही ख़राब करवाऊंगा |
ये सब सोचते-२ मेरी आँखों में थोड़ी निंद्रा भर आई |
कल फिर से Try करूँगा की देकर खुद को दुहाई |
Light on छोड़कर Cement के बिस्तर पर सेज लगाईं |
फिर भगवान् की दुआ से जल्द ही नींद भी आई |
रोज़ की भांति सपने में आज वो फिर से आई |
फिर देखि जब मैंने अपने ऊपर उसके बालो की परछाई |
उसके जुल्फों की काली घटा जब मेरे चेहरे पर लहराई |
उसके साँसों की खुसबू से फिर मेरी साँसे मिल पायी |
फिर उसके होठो की लाली से मेरे दिल में तरंगे टकराई |
ठीक उसी वक़्त मेरे alarm ने आवाज लगाई |
उठते ही नज़रे सीधी laptop से टकराई |
और तुरंत मुझे फिर से deadline की याद आई |
और फिर से google की दुनिया में मैंने अपने अरमानो की watt लगाई |
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